हां हूं मैं लड़की तो क्या करूं मैं मर जाऊं?
आजकल "क्या करूं मैं मर जाऊं" बड़ा ट्रेंड कर रहा है, पर हम औरतों की जिंदगी में तो ये हमेशा ही ट्रेंडिंग रहा..क्यों और कैसे ? चलिए सुनाते हैं... हम लड़कियां पैदा होते ही दुनियादारी की आग में धकेल दी जाती हैं, ओह! लड़की पैदा हुई है "चलो कोई बात नही".... "लडकियां अपनी किस्मत लेकर आती हैं" बधाई हो । भई और सब तो ठीक है पर कोई ये बताए मुझे की क्या लड़के अपनी किस्मत बेचकर आते हैं? बस ये जो "चलो कोई बात नही" बोलते हुए जब गुप्ता चाचा गुजरते हैं तो मन खौल सा उठता है। युद्ध यहीं खत्म नही होता उसके बाद तो असल में शुरू होता है।..."लड़की हो सुबह जल्दी उठा करो", "लड़की हो सलीके से रहा करो", "टाइम से घर आ जाया करो", "दुपट्टे को ढंग से लेकर बाहर जाया करो"। 10वीं के बाद यादव जी की बेटी कौन सा सब्जेट लेगी ये भी पड़ोस के शर्मा जी तय करेंगे क्योंकि शर्मा जी का मानना है कि "लड़की को कोई महंगा कोर्स कराने की क्या जरूरत 4 _ 5 साल में इसे दूसरे घर ही तो जाना है" वैसे हां बात उनकी भी सही है आखिर जब पड़ लिखकर...