मेरा दिल उसका दिमाग...अब वेलेंटाइन डे का क्या होगा????


कहते हैं "लड़कियां दिल से सोचती हैं और लड़के दिमाग से"...पर हां इसका ये बिलकुल मतलब नहीं की लड़कियों के पास दिमाग नहीं होता और लड़कों के पास दिल....
इस बात पर ही निधि की चुटकी लेते हुए मधुर ऑफिस के लिए निकल गया। निधि अलग ही सुबह - सुबह इस विषय को लेकर कोपभवन में थी, कि तभी उसकी सहेली का फोन आया।
हे हाय..."निधि! क्या प्लान है आज के स्पेशल डे का"??? 
निधि ..."क्या प्लान होगा एक नास्तिक से मेरी शादी हो गई है उसका सारा कैलकुलेशन बस अपने टाइम को बचाने में चला जाता है। क्या क्या सोचा था शादी से पहले अपनी शादी में भी मैंने कितना कॉम्प्रोमाइज किया सोचा शादी के बाद सारी हसरतें पूरी करूंगी पर यहां तो माहौल और ही बेकार है। तू ही बता शादी के बाद पहला वेलेंटाइन डे है और मधुर नॉर्मल ही रोज की तरह बिना कुछ स्पेशल फील कराए ऑफिस चला गया। शाम के बारे में पूछा तो जनाब मेरा मजाक उड़ाते हुए बोले तुम लड़कियां भी ना बस दिल से सोचती हो दिमाग भी लगाया करो अब तू ही बता वेलेंटाइन डे के दिन दिल से नही सोचेंगे तो कब सोचेंगे"?? और निधि रुहांसी हो गई।

श्वेता जिसकी अभी शादी भी नही हुई थी वो खुद पति पत्नी के रिश्तों से अंजान थी उसने तो निधि को और चाभी भर दी "क्या बात कर रही है निधि मधुर ऐसा कैसे कर सकता है?? तू क्लियर कर यार कही आज वो किसी और के साथ तो नही सेलिब्रेट कर रहा ये डे, शादी के दिन तो बड़ी तेरी बलाएं ले रहा था अचानक ये बदलाव, मुझे बहुत डर लग रहा है निधि होप तेरी शादी हेल्दी रिलेशनशिप के साथ बनी रही चल टेक केयर हां"। कहते हुए श्वेता ने फोन रख दिया। श्वेता की बात ने तो आग में घी डालने का काम कर दिया था, दरवाजे की बेल बजी निधि चौक गई कि तभी उसकी नज़र समय पर पड़ी और समय हो रहा था उसकी मेड मंजू के आने का।
दरवाजा खुलते ही आज महकती हुई मंजू लाल कलर के सूट में लाल गुलाब बालों में लगाए एंट्री करती है।

निधि .."आज तो बड़ा महक रही है मंजू क्या बात है"? अपनी भोवों को सिकोड़ते हुए निधि ने पूछ ही लिया।
मंजू ... "क्या दीदी मेरे 8 साल के बच्चे को भी मालूम कि आज वो क्या बोलते है वो भेलनटाईन डे होता है न लाल कलर वाला वहिच डे है, तो मेरे मर्द ने मुझे सुबह को ये इत्र, और गुलाब दिया और शाम को चाऊमीन खिलाने ले जायेगा बोलके काम पर गया" कहते हुए मंजू जल्दी मचाने लगी और "चलो जल्दी जल्दी काम करती मैं", कहते हुए किचन की तरफ चली गई।

अब निधि का पारा बुरी तरह हाई हो चुका था और मन ही मन वह खुद को कामवाली मंजू से भी बत्तर समझने लगी थी लगे हाथ अपनी किस्मत को भी कोसने लगी। मंजू की चहक और उसका लाल गुलाब दोनो ही निधि को बहुत चुभ रहे थे। मंजू अपना काम करके जा चुकी थी। निधि सोफे पर बैठी अपने जिंदगी को ना जाने कितने बुरे स्तर पर गिराकर मधुर को उसका जिम्मेदार ठहराने में लगी थी...इतनी टेंशन में लंच भी ना किया था उसने। इस बीच निधि को अपने स्कूल , कॉलेज टाइम के उन सभी लड़को की शक्ल भी याद आ रही थी जिनके प्रपोजल को कभी निधि ठुकरा कर मधुर के पास आई थी। "अच्छा होता मैं लव मैरिज ही कर लेती, ये आज्ञाकारी संतान बनने के चक्कर में एक अनरोमेंटिक रिश्ते को तो झेलना ना पड़ता" अपने आप से ही बातें करती निधि की फोन बेल बजी, फोन उठाते ही निधि मधुर की सारी बुराइयां लेकर बैठ गई "आप लोगो ने मेरे शादी ऐसे इंसान से कर दी" जैसी बातों से शुरू निधि ने 15 से 20 मिनट में अपनी सारी भड़ास निकाल कर खुद को कुछ हद तक हल्का कर लिया था और सामने फोन पर निधि की मां जानती थी, कि इस समय वह किसी की भी नही सुनेगी। इसलिए सोमा जी ने चुप रहकर सब सुनना ही बेहतर समझा।
कुछ देर बाद दोनो तरफ शांती छा गई।
"अब कुछ बोलो भी मां"
"क्या हुआ बेटा क्यों परेशान है तू" ?
निधि "कुछ नहीं "
सोमा जी "देख बेटा हर किसी की सोच आप सी ही हो यू बिलकुल जरूरी नहीं होता, तेरे लिए आज का दिन महत्वपूर्ण होगा पर हो सकता है मधुर के लिए ये आम सी बात हो इसका मतलब ये थोड़े है कि वह तुझे प्यार नही करता। अपने दिल से ये बचपना हटा और थोड़ा समझदारी से काम ले हर मर्द दिल से नहीं सोचता पर औरत पहले दिल की सुनती है और फिर वेलेंटाइन डे सेलिब्रेशन क्या तुम दोनो के रिश्ते की मजबूती का कोई सर्टिफिकेट देगा क्या? " वहीं अगर मधुर ने कोई पहल नहीं की तो तू कर दे, क्या तूने आज का दिन खास बनाने के लिए कुछ किया? ये कहां लिखा है बेटा की पति पत्नी के रिश्ते में पहल सिर्फ पति करेगा अब तेरे पास मौका है तू उसे बता की तेरी सोच क्या है? तेरे दिल की उम्मीद क्या है...धीरे धीरे तुम दोनो एक दूसरे में रम जाओगे और समझने लगोगे की कौन क्या चाहता है?"।

निधि मां की बात समझ रही थी फोन रखते ही पहले वो बाजार गई वहां से सजावट और खाने पीने का कुछ समान ले आई। शाम को मधुर ने जैसे ही घर में एंट्री कि "वाह निधि तुमने तो घर को एकदम रेस्टोरेंट बना दिया है" और थोड़ी देर बाद खाने की टेबल पर मधुर ने निधि से माफी मांगते हुए कहा "सॉरी यार निधि मुझे सुबह तुम्हारा मजाक नहीं उड़ना चाहिए था, तुम्हारी भी अपनी सोच हो सकती है" अब निधि मन ही मन सातवें आसमान पर थी पर क्या करे पत्नी का दिल इतनी आसानी से माफ करने वाला थोड़े होता है और वो तपाक से बोल पड़ी " इतनी आसानी से नहीं इसका हरजाना भुगतना पड़ेगा " और फिर दोनो ही हंस पड़े, मधुर ने निधि का हाथ पकड़ते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया...निधि मन ही मन अपने बचपने वाली दिल की बातों पर मुस्कुरा रही थी और पुरुष मन अपनी खूबसूरत बीवी को बाहों में लिए दिल की चाहत को अंजाम देने जा रहा था...ऐसा ही होता है पति पत्नी का प्यारा रिश्ता जब दिल और दिमाग दोनो मिल जाते हैं।

पति पत्नी के रिश्ते में जब तक हम 2 लोग हैं ऐसी सोच होगी तब तक उस रिश्ते में उम्मीद होगी और वह पूरा न होने पर तकलीफ भी होगी। इसलिए हम एक हैं तो क्या हुआ अगर उसने ना किया आप पहल कर लीजिए...प्यार ही तो है कितना भागेगा❤️

@ammazworld

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