ट्रेंडी सी-सेक्शन...



हे भगवान!क्या ज़माना आ गया है?आजकल की लड़कियों में तो दर्द सहने की छमता ही नहीं रही,  हमारे जमाने में हम घर का सारा काम भी करते थे, सास और पति के ताने भी सुनते थे और तब भी डिलीवरी के एक घंटे पहले तक काम ही कर रहे होते थे। पर आज की बहुएं तो प्रेगनेंट क्या हुईं अपने पति को  उँगलियों पर नचाकर रखती हैं..... भगवान ही मालिक इस नई  पीढ़ी का, कहते हुए रुक्मा जी अपने कमरे में चली गयीं। .. 


रुक्मा जी ये सारी बातें  ड्राइंग रूम में कह रही थीं पर उनकी बहु उपमा अपने कमरे में ही उन बातों को सुन सिसकियाँ भर रही थी। उपमा 7 महीने की प्रेगनेंट थी और पिछले हफ्ते के ही रूटीन चेक अप में उसकी गयनिकोलॉजिस्ट  ने कुछ कॉम्प्लीकेशन्स बताते हुए उसकी डिलीवरी  सिजेरियन ही होगी ऐसा कहा था। साथ ही बच्चा अभी से पेट में काफी नीचे है इसलिए बेड रेस्ट की सलाह दी थी।  इन बातों का रुक्मा जी को जबसे पता चला था तभी से उनका पारा चढ़ा हुआ था। जहाँ पहले बच्चे के आने की ख़ुशी होनी चाहिए थी वहां मात्र सिजेरियन की खबर ने पूरे परिवार में तनाव का माहौल पैदा कर दिया था। 

वैसे अगर तीसरा पक्ष बनकर रुक्मा जी और उपमा में सही गलत का फैसला किया जाए तो शायद दोनों ही अपनी जगह सही हैं। गलत है तो सिर्फ आज के समय में चल रहा सिजेरियन का ट्रेंड। .. जी हाँ,आपको हैरान होने की जरुरत नहीं क्योंकि सिजेरियन के बढ़ते चलन को लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन भी भारत को चेतावनी दे चुका है।   वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के डेटा  के अनुसार सिजेरियन की डिलीवरी दर 10 से  15 प्रतिशत रखने की सिफारिश है, परन्तु जनवरी 2015 से 2016 के समय तक भारत में यह संख्या 17. 2 प्रतिशत थी तो आप अंदाजा लगा लीजिये की आज २०२१ में यह कितनी बड़ चुकी होगी।  हैरानी तो इस बात की जताई जा रही है की भारत की यह संख्या नीदरलैंड और फ़िनलैंड जैसे अमीर  देशों [सिजेरियन के मामले ] की दर से भी कहीं अधिक है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि  अगर यही चलन जारी रहा तो भारत सबसे अधिक सिजेरियन बच्चे पैदा करने वाला देश बन सकता है। 


हालाँकि सिजेरियन डिलीवरी की अनुमति सिर्फ आपातकालीन स्तिथियों में दी जाती है जहाँ माँ या बच्चे को कोई परेशानी आती है।  पर अब तो सिजेरियन का ट्रेंड इतना ज्यादा हो गया है कि  भारत में ही अब लोग शौक से अपने शुभ दिन निकलवा कर सिजेरियन करवाते हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल्स में तो सिजेरियन दर 40.9  हो चुकी है या कहें की प्राइवेट अस्पतालों में तो अधिक्तर सिजेरियन पेशेंट ही देखे जा रहे हैं। 

हम में से कई महिलाओं ने इन बातों का सामना अपनी प्रेगनेंसी के दौरान किया होगा। वहीँ  स्तिथियाँ कई बार अस्पताल  द्वारा ऐसी बनायी  जाती हैं कि  हम घबरा जाते हैं और तुरंत सिजेरियन डिलीवरी के लिए हां कर देते हैं।  वहीँ कुछ अपवाद ऐसे भी हैं जहाँ महिलाएं खुद अपनी  प्रेगनेंसी पता चलते ही  सिजेरियन डिलीवरी की डेट डॉक्टर की सहायता से पहले से ही  तय कर लेती हैं। 

किन स्तिथियों में सिजेरियन डिलीवरी सही है 

👉जब आपके बच्चे की पोजीशन गर्भाशय में सही न हो यानि  कि अगर बच्चा थर्ड ट्राइम सेटर (7  से 9 महीने ) में नीचे की तरफ न हो ,

👉बच्चे का वजन 4 किलो से अधिक होना या उसके सर के आकार का भी कई बार बड़ा होना। 

👉बच्चे के गले में गर्भनाल का फंस जाना। 


👉एक से अधिक यानी जुड़वा या ट्रिप्लेट्स को जनम देनी वाली माँ के लिए सिजेरियन  का विकल्प बेहतर है। 

👉आखिरी समय में इम्युनिटी फ्लूड का(पानी की थैली )जो लेबरपेन में कई बार फट जाती है इससे बच्चे को नार्मल डिलीवरी से बाहर आने में मुश्किल होती है। इस स्थिति में भी तुरंत सिजेरियन कर देना बेहतर होता है। 

👉माँ की हेल्थ सही ना होना जैसे कि माँ का हाई बीपी, शुगर सम्बंधित, हार्ट या ऐसी कोई अन्य बिमारी जो नार्मल लेबरपेन सहने में सक्षम न हो। ऐसी स्थितियों में सीजेरिअन डिलीवरी बेहतर मानी जाती है आदि। 


पर ये ट्रेंड में क्यों है ? 

👉अस्पतालों  की अच्छी कमाई हो जाती है साथ ही सिजेरियन से जुड़ी  सभी मेडिकल फैसिलिटीज का फायदा होता है।  दवाई से लेकर टेस्ट लैब तक सभी का अपना कमीशन तय होता है। 

👉सी- सेक्शन खुद कपल्स भी चुनते हैं   

👉महिलाएं कई बार वजाइनल डिलीवरी की बात सोच कर ही घबरा जाती हैं और वही डर उन्हें सी -सेक्शन का चुनाव करने पर मजबूर करता है 

👉कुछ महिलाएं अपने शरीर को लेकर काफी चिंतित होती हैं जैसे की वजाइनल डिलीवरी में उनके शरीर का वह हिस्सा पहले की तरह नहीं रह जाता जिसका प्रभाव उनके यौन संबंधों  पर भी पड़ता है।  दबी जुबान में ही सही पर डॉक्टर्स भी इस बात को स्वीकारते हैं कि महिलाओं का सी सेक्शन द्वारा डिलीवरी का चुनाव करने में  यह विषय  भी काफी अहम होता है। 

👉सी सेक्शन का खर्च नॉर्मल  डिलीवरी के खर्च का 3 गुना अधिक होता है यानि  कि  शौकिया तौर पर जो कपल्स इसको चुनते हैं वो फाइनैंशली  काफी अच्छे होते हैं। सी सेक्शन चुनने वाले कपल्स पैसों से काफी मजबूत हैं यह इस बात का भी इशारा करता है जिस वजह से भी यह ट्रेंड का एक हिस्सा बनता जा रहा है। 


👉छोटे परिवार जिसमें  एक बच्चे का चलन बहुत तेजी से बड़ रहा है जहाँ लोगों की यह मानसिकता होती जा रही है कि ''एक ही बच्चा चाहिए तो क्यों न बिना दर्द वाले सी -सेक्शन को चुने भले उसके लिए फीस तिगुनी देनी पड़े''.... 

👉 लेट शादियों का ट्रेंड भी कपल को अधिक उम्र में प्रेग्नन्सी कंसीव करने में दिक्कत करता  है और यही समस्या डिलीवरी के समय भी होती इसलिए भी सी -सेक्शन बहुत तेजी से ट्रेंड कर रहा है। 



गलत सलाह से कैसे बंचे ?

अगर आप भी कंसीव करने के बाद पहली बार गयनोकोलॉजिस्ट के पास जा रही हैं और वह दूसरी या तीसरी विजिट के बाद ही आपको सी - सेक्शन के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रही है तो यह गलत सलाह  हो सकती है और आपको अपनी डॉक्टर बदल कर दूसरे डॉक्टर से भी कंसल्ट करना चाहिए।


रेगुलर चेकअप्स, पौष्टिक भोजन, प्रेगनेंसी एक्ससरसाइज़ और खुश रहने जैसी  बातें भी आपको नार्मल डिलीवरी में सहायक हैं। इस लेख के माध्यम से सी सेक्शन के चलन को समझने की कोशिश की गयी है प्रेग्नेंट होते ही नार्मल डिलीवरी होगी या सिजेरियन ? हम महिलाएं इस सवाल से जरूर गुजरती हैं ऐसी  स्तिथि में परेशान न होकर आप सजग रहें यही हमारी कोशिश है। 

आप ही सोचे रुक्मा जी की गलती है या उपमा की या फिर ट्रेंडी सी-सेक्शन की। 



@ammazworld 

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