एक गृहणी की चाय....☕🍵☕
ओफ! हो रे ये ठण्ड, आज तो बड़ा मन है की बस इस ओस भरे सुहाने मौसम में प्यार की थोड़ी गरमाहट हो, एक कॉलेज कपल की तरह एक दूसरे की नज़रों में हम घिरे रहे और हाथों में सुकून भरी चाय की प्याली हो। आज कुछ ऐसा हो की मेरी इस हरी- भरी बालकनी में हमारे इश्क का मौसम आवारा हो...... छत से ओस में भीग चुके कपड़े उतारते - उतारते मैं तो मानो इस मौसम में कहीं खो ही गयी थी, अगर पति देव आवाज़ न लगाते कि ''नहा चुका हूँ बनियान, टॉवेल पंहुचा दो मेरी रानी''. रानी यह शब्द सुनते ही मानो पूरे शरीर में खून का दौरा डबल स्पीड में बड़ जाता है, क्योंकि जब मुझे ये रानी बुलाते हैं ना तो 'नौक ' शब्द साइलेंट होता है और हम औरतों को सिर्फ रानी सुनाई देता है। अभी लाई कहते हुए सुबह के 7 बजे वाली उस रोमांटिक चाय की आस लिए में किचन की ओर बढ़ गई पर चाय की तलब मेरी बरक़रार थी एक तरफ कूकर चढ़ाया और दूसरी तरफ चाय के लिए दूध...