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रिश्ते भी समय मांगते हैं....

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अक्सर हम औरतें अपने परिवार को खुश रखने या कहें परफेक्ट बनने के चक्कर में खुद को तो नजरअंदाज करते हैं पर साथ ही कई बार पति पत्नी के रिश्तों में भी अनजानी दूरियां जगह कर जाती हैं। इसी विषय में पढ़िए मेरी कहानी। शिप्रा मुझे लेट हो रहा है मैं जा रहा हूं, तुम रहने दो में कैंटीन से खाना खा लूंगा" कहते हुए राज अपना बैग, मोबाइल लेकर शिप्रा के किचन से ड्राइंग रूम में पहुंचने से पहले ही घर से निकल गया। शिप्रा ने दरवाज़ा बंद कर अपने शरीर को इस तरह सोफ़ा पर रखा मानो ना जाने कितने बोझ के संग वह बैठ रही हो। बोझ ही तो था अब पति पत्नी का ये रिश्ता, जहां पति राज अब सिर्फ सोने और नहाने ही घर आता और बाकी पूरे समय वह ऑफिस के काम में व्यस्त रहता था। शिप्रा और सोच में डूबती उससे पहले ही सासू मां की आवाज़ कि "बहु मेरा भी नाश्ता लगा दो " और फिर अपने बोझ को उतार शिप्रा फिर लग गई परिवारिक जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने में... शिप्रा और राज की शादी को मात्र 5 साल ही गुजरे थे, जिसमें शिप्रा अपने 2साल के बेटे  की अच्छी मां, आधा शरीर लकवा ग्रस्त ससुर की अच्छी बहू, व कभी भी खुश ना हो पाने व...