रिश्ते भी समय मांगते हैं....
अक्सर हम औरतें अपने परिवार को खुश रखने या कहें परफेक्ट बनने के चक्कर में खुद को तो नजरअंदाज करते हैं पर साथ ही कई बार पति पत्नी के रिश्तों में भी अनजानी दूरियां जगह कर जाती हैं। इसी विषय में पढ़िए मेरी कहानी।
शिप्रा ने दरवाज़ा बंद कर अपने शरीर को इस तरह सोफ़ा पर रखा मानो ना जाने कितने बोझ के संग वह बैठ रही हो। बोझ ही तो था अब पति पत्नी का ये रिश्ता, जहां पति राज अब सिर्फ सोने और नहाने ही घर आता और बाकी पूरे समय वह ऑफिस के काम में व्यस्त रहता था।
शिप्रा और सोच में डूबती उससे पहले ही सासू मां की आवाज़ कि "बहु मेरा भी नाश्ता लगा दो " और फिर अपने बोझ को उतार शिप्रा फिर लग गई परिवारिक जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने में...
शिप्रा और राज की शादी को मात्र 5 साल ही गुजरे थे, जिसमें शिप्रा अपने 2साल के बेटे की अच्छी मां, आधा शरीर लकवा ग्रस्त ससुर की अच्छी बहू, व कभी भी खुश ना हो पाने वाली अपनी सास को मां समझ उनकी बेटी बनने की कोशिश कर रही थी। परंतु इन सब के बीच वह राज और अपने रिश्ते को कई बार अनदेखा करती। जब भी समय मिलता शिप्रा को, वह घर के हर काम को परफेक्ट और समय से पहले करने की होड़ में राज के संग बिता सकने वाले उन पलों को खो देती थी।
वह सोचती "कोई ना राज को समझा लूंगी"।
शुरुवात में ये रिश्ता इतना रूखा ना था, अरेंज मैरेज होने की वजह से एक दूजे को जानने की उत्सुकता हर कपल की तरह इनमें भी थी, राज भी हर वीकेंड शिप्रा को बाहर घुमाने ले जाता, ऑफिस से दिन भर में कई कॉल करता, हर सुबह शिप्रा के पसंद के कपड़े पहनकर ही ऑफिस निकालता, पर अब हालात बिलकुल विपरित थे।
शादी के बाद जहां एक ओर शिप्रा प्रेगनेंट हुई तो वहीं दूसरी ओर उसके ससुर जी छत कि सीढ़ियों से गिरने कि वजह से इलाज के लिए शहर लाए गए यहां इलाज के दौरान उन्हें आधे शरीर में लकवा की शिकायत हो गई। अब वो राज और शिप्रा के साथ ही रहने को मजबूत थे। ऐसे समय में शिप्रा का प्रेगनेंट होना उसकी सास को एक आंख ना भाए और वो बार बार शिप्रा और राज से कहें, " कि बच्चा अबॉर्ट करवा लो अभी अपने ससुर की केयर कर लो" इसी बात पर शिप्रा ने सास को वादा दिया कि उनकी सेवा में कोई कमी ना होगी पर उसे पहला बच्चा ना गिरवाने को कहें। राज ने भी नौकर रख माहौल को संभाला और शिप्रा की भी केयर की।
बच्चा होने के बाद बच्चे और ससुर की पूरी जिम्मेदारी शिप्रा पर आ गई, सास नाम मात्र के लिए सिर्फ राज के सामने मदद करतीं। राज सबकुछ समझता, शिप्रा से कहता भी , कि " शिप्रा इं सबके बीच तुम खुद को भी समय दो, म्युझे भी समय दो, कुछ काम नौकरों से भी करवा लिया करो" पर शिप्रा पर तो बेस्ट बहु, मां, पत्नी बनने का जुनून सवार था। शिप्रा और सब तो करती पर राज के प्रति वह लापरवाह होती चली गई अपनी जिम्मेदारियों के आगे।
एक दो बार राज ने टोका भी था शिप्रा को...
राज - शिप्रा अब तो तुम मुझे समय ही नहीं देती, मैं हमारी लॉन्ग ड्राइव , नुक्कड़ की चाय और गाड़ी में बजती धुन पर तुम्हारी आंखो के इशारे बहुत मिस करता हूं।
शिप्रा - मम्मीजी क्या सोचेंगी राज, बीमार पिता को छोड़ बहु बेटा घूमने गए हैं ना बाबा ना राज ... मुझे ऐसे इल्जामों से डर लगता है।
और फिर धीरे धीरे हर बार ना...ना..ना... सुनते सुनते राज भी बदल गया अपने और शिप्रा के रिश्तों को लेकर।
आज शिप्रा का जन्मदिन था, और सुबह सुबह राज का बिना विश किए यूं निकाल जाना ही शिप्रा को अपनी पुरानी यादों में खींच लेे गया । जहां राज रात 12 बजे से ही सेलिब्रेशन शुरू कर देता था और शिप्रा का ये दिन यादगार बना देता था। पर अब हालात कुछ और थे और शिप्रा पूरी तरह से इसके लिए खुद को ही गुनहगार मान रही थी।
फोन की बेल बजी, शिप्रा ने फोन उठाया...
ओह ! मेरी बहना जन्मदिन मुबारक हो...धीमी आवाज़ में थैंक यू... सुन शिप्रा की बड़ी बहन ने पूछा ," क्या हुआ तू मायूस क्यों हैं"? किसी अपने के इसी पुचकारने को तरसती शिप्रा बिफर कर रो पड़ी और दिल का हाल अपनी बड़ी बहन को सुना बैठी।
शिप्रा की बहन ने उसे समझाया " शिप्रा ये तो हर पति पत्नी के बीच होता है इसमें तेरी गलती नहीं हालात गलत थे, और फिर तुम किसी को इतना अनदेखा करोगी तो फिर राज भी कब तक समझेगा उसने भी इसे आदत बना ली, पर अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है तुम राज से दिल की बात खुल कर कहो, कहोगी तभी बात सुलझेगी चुप रहोगी तो बात और उलझेगी और रिश्ते में दूरियां लाज़िमी है। तुम्हें राज को भी उसके हिस्से का समय देना होगा, और तुम ये एक बात जान लो घर के काम आगे पीछे होते रहते हैं उसके लिए तुम रिश्तों को दाव पर मत लगाओ, और तुम कितना भी कर लो तुम परफेक्ट कभी नहीं हो सकती। इसलिए खुद के लिए भी समय निकालो"...
दीदी की बात गलत तो नहीं थी, पर शिप्रा के मन में यही ख्याल बार बार आ रहा था, कि "काश मैंने अपने रिश्तों को समय पर समय दिया होता"।
मेरी कहानी हम आज की महिलाओं व व्यस्त समय से प्रेरित है । हम सचमुच खुद को परफेक्ट प्रेजेंट करने के चक्कर में ना जाने कितने कीमती समय को खो देते हैं। जबकि हमें अपने आप के लिए भी समय निकालना चाहिए, हमें हर पल अपने पति पत्नी के रिश्तों को रिचार्ज करते रहना चाहिए।
शिप्रा ने भी किया राज से खुलकर अपने दिल की बात कही....
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