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एक आस...

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एक आस लिए बैठी हूं एहसास लिए बैठी हूं, अपने ख्वाबों को पूरा करने का, अरमान लिए बैठी हूं। उम्मीद है वो सूरज भी जगमगाएगा, जिस दिन उसकी रोशनी में मेरा नाम भी दिख पाएगा, मैं हारी नहीं हूं अब भी, हराई गई कई बार, पर आज भी अपनी जीत का आग़ाज़ लिए बैठीं हूं। हौसला है पिता का, जस्बा मां ने दिया है, आगे बड़ने की ललकार लिए बैठी हूं। उम्मीद है दुनिया में सच्चाई ही जीते उसी जीत की पर्ची में बस अपना नाम लिए बैठी हूं, @ammazworld.blogspot.com