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जय हो महिला दिवस की....

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जय हो महिला दिवस की🙏🙏 8मार्च के लिए बहुत तैयारियां चल रही हैं, बहुत से कार्यक्रमों का बड़े स्तर पर आयोजन है, महिलाओं को सम्मानित कर खुद को समाज में एक प्रतिष्ठित प्राणी भी तो घोषित करना है। महिलाओं की प्रगति के नाम पर कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, किरण बेदी, सान्या नेहवाल जैसे चमकते नामों को सुनाकर आप असल स्थिति से मुंह नहीं मोड़ सकते.... बहुत कुछ चल रहा है देश में, चलने दो, अच्छा बुरा जो भी हो रहा है होने दो कोई फर्क नहीं पड़ता। बेशक नही पड़ता और ना ही पड़ना चाहिए आखिर आपको तो कोई समस्या नहीं है ना??? जी नहीं नही है... पर कभी नहीं होगी ऐसा भी नहीं है... अगर निर्भया जैसी साधारण लड़की पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सेफ नहीं , अगर हैदराबाद में अपनी स्कूटी से चलती लड़की सेफ नहीं, उन्नाव में परिवार के साथ चलती लड़की सेफ नहीं, तो क्या आप सेफ हैं आपके घर की बेटी का भविष्य सेफ है इस जंगल राज में।  कभी रेप, कभी दहेज, कभी छेड़खानी, कभी जाति भेद क्या सचमुच महिलाएं प्रगति कर रही हैं।  पिता के सामने उसकी बेटी से छेड़खानी रोकने पर गवानी पड़ी उस बाप को अपनी जान....आज बदहाल बेटी कर रही ...

हां हूं मैं लड़की तो क्या करूं मैं मर जाऊं?

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आजकल "क्या करूं मैं मर जाऊं" बड़ा ट्रेंड कर रहा है, पर हम औरतों की जिंदगी में तो ये हमेशा ही ट्रेंडिंग रहा..क्यों और कैसे ? चलिए सुनाते हैं... हम लड़कियां पैदा होते ही दुनियादारी की आग में धकेल दी जाती हैं, ओह! लड़की पैदा हुई है "चलो कोई बात नही".... "लडकियां अपनी किस्मत लेकर आती हैं" बधाई हो । भई और सब तो ठीक है पर कोई ये बताए मुझे की क्या लड़के अपनी किस्मत बेचकर आते हैं? बस ये जो "चलो कोई बात नही" बोलते हुए जब गुप्ता चाचा गुजरते हैं तो मन खौल सा उठता है। युद्ध यहीं खत्म नही होता उसके बाद तो असल में शुरू होता है।..."लड़की हो सुबह जल्दी उठा करो", "लड़की हो सलीके से रहा करो", "टाइम से घर आ जाया करो", "दुपट्टे को ढंग से लेकर बाहर जाया करो"।     10वीं के बाद यादव जी की बेटी कौन सा सब्जेट लेगी ये भी पड़ोस के शर्मा जी तय करेंगे क्योंकि शर्मा जी का मानना है कि "लड़की को कोई महंगा कोर्स कराने की क्या जरूरत 4 _ 5 साल में इसे दूसरे घर ही तो जाना है" वैसे हां बात उनकी भी सही है आखिर जब पड़ लिखकर...

जिंदगी जिंदादिली में बसती है

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जिंदगी जिंदादिली में बसती है और मैं जिंदादिल हूं फिक्र मुझे उन जिंदागियो की है जो ना चाहते हुए भी घुटती है तिन तिन करके मरती है नहीं कह पाती अपने दिल की जुबां किसी से और एक दिन जमाने से रुखसत अदा करती है अगर आप भी जिंदादिल हैं तो  जिंदा होने का फर्ज अदा कीजिए अपने आस पास की घुटती जिंदगियों में झाकिए और एक के इंसान होने का कर्ज अदा कीजिए।

मैं जिंदादिल हूं और आप???

जिंदगी जिंदादिली में बसती है और मैं जिंदादिल हूं फिक्र मुझे उन जिंदागियो की है जो ना चाहते हुए भी घुटती है तिन तिन करके मरती है नहीं कह पाती अपने दिल की जुबां किसी से और एक दिन जमाने से रुखसत अदा करती है अगर आप भी जिंदादिल हैं तो ए जिंदा होने का फर्ज अदा कीजिए अपने आस पास की घुटती जिंदगियों में झाकिए और एक के इंसान होने का कर्ज अदा कीजिए। #depression @ammazworld शुक्रिया

हां मैं ही मैं हूं...

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दुनिया में हर किसी का अपना एक सफर होता है ये कहने की बातें हैं। आज भी हमारे देश का एक बड़ा तबका औरतों को आजादी महसूस करने नहीं देना चाहता। वो  उस तबके की औरतें कुछ लड़तीं हैं, कुछ भागती हैं ऐसे ही एक औरत के मन में भागने का ख्याल आया वो ये सोचती थी कि अन्य औरतों की जिंदगी मुझसे बेहतर है और इसी सोच के साथ अपने जानने वाली औरतों से जब खुलकर उसकी बातें हुईं तो उसे ये महसूस हुआ कि मैं अकेली नहीं बल्कि बंद दरवाजों की पीछे न जाने कितनी मैं हूं, देखा जाए तो बस मैं ही मैं हूं। और पढ़िए क्या देखा उसने क्या महसूस किया और क्या बयां किया..... मैं निकली थी कहीं अपनी तलाश में छान - बीन में पता चला कि हर घर में एक मैं हूं। हैरान परेशान खुद की तलाश में हर मकान में लाचार जिंदा लाश एक मैं हूं। रिश्तों में बंधी थी वो कहने को हजार पर दिल से निभते रिश्तों को तरसती हर घर में मैं हूं। लाई गई थी मायके से वो वादों संग हज़ार पर झूठे वादों की ससुराल में सुनवाई हुई कहां  अपने हक के लिए कहरती उस घर में मैं हूं। वैसे तो लक्ष्मी नाम कईयों ने दिए थे पर अपनी जरूरतों को सिसकती उस घर में मैं हूं खुद क...

मेरा दिल उसका दिमाग...अब वेलेंटाइन डे का क्या होगा????

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कहते हैं "लड़कियां दिल से सोचती हैं और लड़के दिमाग से"...पर हां इसका ये बिलकुल मतलब नहीं की लड़कियों के पास दिमाग नहीं होता और लड़कों के पास दिल.... इस बात पर ही निधि की चुटकी लेते हुए मधुर ऑफिस के लिए निकल गया। निधि अलग ही सुबह - सुबह इस विषय को लेकर कोपभवन में थी, कि तभी उसकी सहेली का फोन आया। हे हाय..."निधि! क्या प्लान है आज के स्पेशल डे का"???  निधि ..."क्या प्लान होगा एक नास्तिक से मेरी शादी हो गई है उसका सारा कैलकुलेशन बस अपने टाइम को बचाने में चला जाता है। क्या क्या सोचा था शादी से पहले अपनी शादी में भी मैंने कितना कॉम्प्रोमाइज किया सोचा शादी के बाद सारी हसरतें पूरी करूंगी पर यहां तो माहौल और ही बेकार है। तू ही बता शादी के बाद पहला वेलेंटाइन डे है और मधुर नॉर्मल ही रोज की तरह बिना कुछ स्पेशल फील कराए ऑफिस चला गया। शाम के बारे में पूछा तो जनाब मेरा मजाक उड़ाते हुए बोले तुम लड़कियां भी ना बस दिल से सोचती हो दिमाग भी लगाया करो अब तू ही बता वेलेंटाइन डे के दिन दिल से नही सोचेंगे तो कब सोचेंगे"?? और निधि रुहांसी हो गई। श्वेता जिसकी अभी शादी भ...

औरत और मर्द...

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