तुम इतना क्यों करती हो??
तुम इतना क्यों करती हो ?
सिमटती दिनचर्या तुम्हारी रात १२ बजे और फिर सुबह 6 बजे का अलार्म तुम्हे उठाता है
उसके बाद जो तुम शुरू होती हो एक पल के लिए ना तुम्हे कोई बैठाता है।
क्यों करती हो तुम इतना जब हर करने का एहसान नहीं कोई चुकाता है?
ऐसा क्या है परिवार के इन चार अच्छर में जो सब कुछ तुमसे करवाता है ?
रीमा मुस्कुराई अलमारी का दरवाजा बंद कर बेड पर आराम से बैठने आयी ...
थोड़ा और मुस्कुरायी...
अपने लिए पति को चिंतित देख..
अपनी किस्मत पर इतराई..
तकिये को प्यार से उठाकर अपनी गोदी में लेते हुए पति के बगल में धमक कर बैठी और मन ही मन आज दिल की बात कह देती हूँ सोचते हुए बोली
तेरी निशानियों से लदी माथे से पैरों की उँगलियों तक
सास ससुर की छत का एहसान मुझ पर
तेरे रहने से ही मेरा हर श्रृंगार है
तो कैसे ना करू मैं तेरी फिकर
ये समझाता मुझे आज का समाज है
मैं बेकार न कहलाऊँ ये आता ख्याल कई बार है
मैं भी बनाना चाहती हूँ अच्छी माँ, लाड़ली बहु और पत्नी
इसी उम्मीद से हो जाता सब कुछ हर बार है
मेरा प्यार अपनी जगह मेरा सम्मान अपनी जगह पर तुमसे और इस परिवार से मैं हूँ
ये भरा गया है मुझमें कूट कूट कर
और यही डर करवाता सब कुछ बार बार है
समीर बोला...
इन सब में मेरी प्यारी रीमा पर तुम कहाँ हो ?
ये पत्नी बहु और माँ कोई ऑफिशियल जॉब की पोस्ट नहीं
दिल से जो हो करो बाकी कोई जोर नहीं
दो खुद को भी टाइम तुम भी जीने का हक़ रखती हो
मेरी निशानियों के बोझ तले तुम क्यों इतना घुटती हो?
तुम मुझसे प्यार करो मेरी जिम्मेदारियों से नहीं
क्योंकि मैं तुम्हारा सम्मान करना चाहता हूँ तुम्हारी मजबूरियों का नहीं।
रीमा मुस्कुरायी और नज़रों से ली बालाएं
बात हुई दोनों में और बात सुलझ गयी।
उलझने, दिक्कते और मजबूरियां हर रिश्ते में होती हैं मायने ये रखता है कि आप उस रिश्ते को कितने करीब से देख, समझ और अपनी कौशलता से सुलझाते हैं। और यह बात महिला व पुरुष दोनों पर लागू है....
@ammazworld
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