औरतें भी खुश होती हैं क्या ?


महिला और पुरुषों की सरंचना बिलकुल अलग है यह तो हम जानते ही हैं पर क्या आप जानते औरतें पुरुषों से ज्यादा खुश और संतुष्ट रहती हैं। ये मैं नहीं बल्कि, 160 देशों के लिए गैलप वर्ल्ड पोल द्वारा किये गए रिसर्च में पाया गया है। रिसर्च में यह कहा गया है कि औरतें मर्दों से ज्यादा खुश और संतुष्ट रहती हैं। ...अब रिसर्च है तो बात साबित भी है और हम भारतीय महिलाओं पर तो यह रिसर्च शत - प्रतिशत सही बैठती है।



अगर कोई न्यूज़ रिपोर्टर माइक लेकर निकले और हम महिलाओं से पूछे की "आपको किस बात से ख़ुशी मिलती है "तो  जवाब क्या होगा?  इसी सवाल की तलाश में जब मैं निकली तो बात लंबी हो गयी और मन में न जाने कितनी उठा पटक शुरू हो गयी। ..जवाब की बेचैनी ने पहले तो खुद को ही आईने के सामने खड़ा कर सवाल कर लिया। ....जवाब समझ नहीं आया कि 
आखिर कौन सी ऐसी बात है जो मुझे खुशियां देती है। ... शादी शुदा हूँ और पतिव्रता नारी भी,तो पहला ख्याल तो पति परमेश्वर का ही आया। .... क्योंकि शादी के बाद हम महिलाओं की पूरी खुशियां परिवार के आसपास घूमकर ही रह जाती है। 

 शादी की बाद पति से मिले छोटे छोटे तोहफे, तारीफें ही हमें खुश कर जाती हैं। 
ये बात अलग है कि कई बार वह तोहफे हमें कभी मुँह फुलाकर, कभी हफ्ते भर पहले से ओकेजन को जताकर तो कभी खुद उनके पर्स से निकाले पैसों की शॉपिंग करके ही मिली हों पर हम खुश हो लेते हैं। उसके बाद बच्चों की दुनिया को हम अपनी दुनिया बना उसी में खुश रहने लगते हैं। 

पर क्या हम खुद के लिए कभी खुश होते हैं ? 
इस सवाल का जवाब हर महिला का अपना है, पर मैं बताती हूँ लगभग सबका एक जैसा ही है क्यों ? क्योंकि हम अपने लिए सोचते ही नहीं, जी हाँ बिलकुल सही है,यह कि हम खुद को हर किसी की ख़ुशी में खुश कर लेते हैं  पर अकसर हम खुद के लिए कभी खुश नहीं होते। आप पाठकों में से सबकी अपनी राय हो सकती है पर असल में अपनी खुशियों को समझने के लिए पहले खुद को समय देना शुरू करें। 

खुद के लिए दिन के 12 घंटों में से सिर्फ 3 घंटे निकालें। इन घंटों को तीनो पहर में 1 -1 -1 घंटों में बांटकर उसका सदुपयोग करें। 

पहला घंटा 


सुबह का पहला घंटा अपनी सेहत और शरीर के लिए रखें। घरेलू काम निपटा कर रेगुलर व्यायाम करें ये या फिर आप , जिम ,योग ,ज़ुम्बा ,रनिंग ,मैडिटेशन, वॉक इन सभी को सप्ताह के 6 दिन में डिवाइड करिये। ..जैसे की सोमवार को व्यायाम , मंगलवार योग, बुधवार को जुम्बा वर्कआउट आदि.  इसके लिए आपको बिलकुल भी बाहर जाने की जरुरत नहीं  क्योकि ऐसी कई साइट्स हैं, यू टूब वीडियो हैं  जिसे देख कर आप घर पर ही शुरुवात कर सकती हैं। पर सिर्फ सोचे नहीं करें भी। अभी आप बेशक स्वस्थ होंगी पर यह पहला घंटा आपको ताउम्र स्वस्थ रखेगा। 

  
                                                                                                                                                             दूसरा घंटा 

आपकी दोपहर का दूसरा महत्वपूर्ण घंटा, इसमें आप खुद की स्किन और सुंदरता को समय दें। 
फेस पैक्स लगाएं, कभी बालों के लिए कुछ करें, कभी पसंदीदा कपड़ों को पहनकर सेल्फी लें, अपने आर्ट क्राफ्ट के शौक से कुछ बनाएं, कभी अपनी पसंद की किताबें पढ़ें, कभी रिमोट की मालकिन बन खुद की पसंद के चैनल्स देखें।इन कामों से मिली संतुष्टि आपको एक सुखद और स्वस्थ अनुभव देगी। 





तीसरा घंटा 


 सबसे महत्वपूर्ण आपका तीसरा घंटा जहाँ आपको अपनी आदत में शामिल करना है डायरी लिखना।  यहाँ आप अपनी दिनचर्या, सोच , दिन की आपकी गलती , और अगले दिन के आपके महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता दें। अगर आप लिखना पसंद नहीं करती तो आप इन बातों को सोच भी सकती हैं और अगले दिन के लिए एक स्मार्ट तैयारी कर सकती हैं। साथ ही सोने से पहले अपने डेली स्किन रूटीन को जरूर फॉलो करें। इससे आपकी प्लांनिग स्किल्स डेवलप होंगी और आपकी अगले दिन की सुबह एक उद्देश्य के साथ होगी। 


दिन के आपके अपने लिए बिताये ये तीन घंटे आपको मानसिक के साथ साथ शारीरिक सुख भी देंगे। और तब जब पड़ोस की चाची पूछें की ''क्या कर कर रही हो आजकल बड़ा चहक रही
हो'' तो शान से कहिये गा '' कुछ नहीं बस खुद को समय दे रही हूँ ''

याद रखिये रेस्टॉरेंट में पति और बच्चों की पसंद का खाना खुद आर्डर करना और व्यर्थ न जाए इसलिए बच्चे की प्लेट भी खुद खत्म करना यह आपकी मजबूरी है आपकी अपनी ख़ुशी नहीं। हाँ ये मज़बूरी भी अच्छी है कभी कभी होनी भी चाहिए पर हर बार नहीं। आपको अपने लिए भी जीना सीखना चाहिए क्योंकि आप भी अपनी खुशियों की पूरी हकदार है......



औरतों की  जिंदगी से जुड़ी व् प्रेरणा भरे अन्य आर्टिकल्स पढ़ने के लिए आते रहिएगा।

धन्यवाद

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