आखिर वह क्या गलत करती है ?



हम महिलाओं पर लगने वाले कुछ आम इलज़ाम लेकर बनी मेरी ये कविता पढ़े और बताएं आप कितना इत्तेफाक रखती है मेरे इस ख्याल से। ...... 

पापा की दुलारी थी ,

कभी न किसी से हारी थी ,

अगर यही सोच वह ससुराल में रखती है ,

तो वह क्या गलत करती है?


 सासू माँ से सासू हटा लो ,

ससुरजी को पापाजी पुकारो ,

माँ - बाप समझो और सेवा करो, 

फ़र्ज़ के समय बेटी और हक़ के समय बहु बना दी जाती है ,

इस बात पर क्यों ? कहकर जब वो सवाल करती है, 

तो क्या गलत करती है ?


घर से पूरे परिवार तक 

पति के मोज़े से लेकर उसके रूमाल तक ,

जब सब कुछ वह खुद संवार कर रखती है ,

ऐसे में  खुद को सँवारने पर अगर वह पार्लर जाकर थोड़ा खर्चती है, 

तो वह क्या गलत करती है ?


तारीफ के लिए पड़ोस के शर्मा जी की मॉडर्न बहु चाहिए ,

और पति को दोस्तों की डिज़ाइनर पत्नी ,

ऐसे में अगर वह खुद को थोड़ा जीन्स में फिट करती है ,

तो वह क्या गलत करती है?


उम्मीदों से पली  बढ़ी ,

लाडो पिता की रही परी ,

पर जब ससुराल में कोई इज़्ज़त न मिली ,

तो खुद की आत्मसम्मान के लिए अगर वह सर उठा के बात करती है, 

तो वह क्या गलत करती है?


हर कला में माहिर, 

खुद को हर जगह फिट कर जाती है ,

अपनी डिग्रियों को अनदेखा कर ,

हाउसवाइफ बनकर जी जाती है,

वह कहती नहीं पर उम्मीद तो करती है ,

जो दोगे वही पाओगे, 

अगर यही रीत है तो आप ही बताओ ,

वह क्या गलत करती है ?

वह क्या गलत करती है ?


@ammazworld




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