एक गृहणी की चाय....☕🍵☕

                  

ओफ! हो रे ये ठण्ड, आज तो बड़ा मन है की बस इस ओस भरे सुहाने मौसम में प्यार की थोड़ी गरमाहट  हो, एक कॉलेज कपल की तरह एक दूसरे की नज़रों में हम घिरे रहे और हाथों में सुकून भरी चाय की प्याली हो। आज कुछ ऐसा हो की मेरी इस हरी- भरी बालकनी में  हमारे इश्क का मौसम आवारा हो......

 छत से ओस में भीग चुके कपड़े उतारते - उतारते मैं  तो मानो इस मौसम में कहीं खो ही गयी थी, अगर पति देव आवाज़ न लगाते कि ''नहा चुका हूँ बनियान, टॉवेल पंहुचा दो मेरी रानी''.  रानी यह शब्द सुनते ही मानो पूरे शरीर में खून का दौरा डबल स्पीड में बड़ जाता है, क्योंकि  जब मुझे ये रानी बुलाते हैं ना तो  'नौक ' शब्द साइलेंट होता है और हम औरतों को सिर्फ रानी सुनाई देता है। 

अभी लाई  कहते हुए सुबह के  7  बजे वाली उस रोमांटिक चाय  की आस लिए में किचन की ओर  बढ़  गई  पर  चाय की तलब  मेरी बरक़रार थी एक तरफ कूकर चढ़ाया और दूसरी तरफ चाय के लिए दूध खौलने रख दिया।

 ''मम्मा मुझे किसी ने म्यूट कर दिया '' मेरी 7  साल की बेटी चिल्लाई

बेलन उठाया था रोटी बेलने के लिया मन तो किया उस म्यूट करने वाले को  डेस्कटॉप पर ही बेलन फेंक कर मारू पर  तभी ख्याल आया कि "मैडम आप सिर्फ अपने पति की रानी है वो भी सिर्फ नाम की '' और बेलन लोई पर रखकर  चल पड़ी मैं टेक्नोलॉजी से युद्ध लड़ने। आजकल तो आए  दिन इस न्यू नार्मल में ऑनलाइन क्लासेज के सियापे से तो मैं तंग आ गयी हूँ... बड़की को अनम्यूट करते- करते चुटकी और उसके पिता दोनों अनम्यूट हो गए। .. 

चुटकी का रोते हुए गुडमॉर्निंग हुआ और पति देव को ऑफिस के लिए लेट हो रहा था..... किचन की तरफ दौड़ी तो पतेले में दूध भी गुस्से में उफान मारते हुए कह रहा था '' बड़ी ठण्ड है मेरी गर्लफ्रेंड चायपत्ती को तो भेज दो मोहतरमा! उसके साथ उबाल लेने का मज़ा ही कुछ और है'' पर अफ़सोस मेरी ही तरह उसकी भी ख्वाहिश अधूरी रही और उस उबले हुए दूध को चुटकी की बोतल में भर उसे किसी तरह मैंने चुप कराया। 

ब्रेकफास्ट की प्लेट सजी तो पतिदेव ''क्या बनाई हो आज मेरी रानी बड़ी महक आ रही है जल्दी टिफ़िन भी दे दो''.... और फिर ये साइलेंट नौक वाली रानी टिफ़िन में अपनी  सुबह 7 बजे वाला रोमांस पैक करते करते गुनगुनाने लगी '' मैं तैनू समझावा की न तेरे बिना लगता जी'' और तभी चुटकी मैडम  ''मम्मा पॉटी'' तभी नज़र घड़ी पर पड़ी तो  उस 7 बजे वाले रोमांस के साथ मुझे 10  बज चुके थे।  पति को टिफ़िन थमाते हुए मैं  वाशरूम की तरफ भागी। चुटकी जी हलकी हुई तो अपने खिलौनों संग बिजी हो गईं । 




पर जब पतिदेव को बाय कहकर घर की तरफ पलटी तो घर की हालत किसी  तबेले से कम  न थी। ...घर को समेटने से पहले मन में ख़्याल  आया  कि ''आज मेरा रोमांस तो अधूरा रह गया चलो दूध को ही उसकी गर्लफ्रेंड से मिलवाया जाए'' , ये सोचते हुए फिर दूध खौलने रख दिया, चायपत्ती दीदी को उनकी सखी अदरक के संग दूध में डालने के बाद तो मानो मुझमें  किसी मोटर साईकिल की आत्मा आ गयी हो और फिर  फूल स्पीड में फर्राटे से काम ख़त्म कर मैंने  पति देव के तबेले को अपना घर बना दिया। ..इस बीच चाय की महक बार बार मुझे बुला रही थी

इस बार तो मैं पहुँच भी गई..... चाय को अपने पसंदीदा कप में छानकर जब में बालकनी में सजाये हुए  अपने कोने पर बैठी  तो 10 . 30  बज चुके थे हज़ारों ख्वाहिशें  लेकर बैठी ही थी, कि  डोरबैल बजी....  काम के लिए झुमरी आ चुकी थी। 

 चाय बालकनी को और बालकनी चाय को निहार रही थी.... क्योंकि झुमरी सिर्फ मेरी कामवाली नहीं बल्कि  वह मेरी सोसाइटी का लोकल न्यूज़ पेपर थी  और आते ही जो वह शुरू होती थी  तो आप उसे नज़रअंदाज़ करने की हिमाकत भी  नहीं कर सकते। उसकी हाँ में हाँ मिलाती मैं बालकनी से अपना कप उठाकर होठों तक पहुँचाती उससे पहले ही मुझे उसकी नाराज़गी  (ठंडक) का एहसास हो गया।

 एक बार फिर उस चाय को गरम करने की प्रक्रिया में मैंने झुमरी के लिए भी उसमें  चाय बड़ा दी और इस बार सफलता हासिल हुई चाय मेरे होंठों तक पहुँच गयी पर वो 7  बजे वाला माहौल न बना...  झाड़ू-पोछा करती झुमरी कहीं बालकनी में पहुंच जाती , कहीं ड्राइंग रूम में और जो कसर बचती मेरी और मेरी चाय की आशिकी में वो चुटकी के नखरों से पूरी हो जाती। ... 

आखिरकार पूरे घर में  उछलते कूदते 11 . 10  पर आज मेरी चाय ख़त्म हुई। ..... हालांकि हालात रोज ऐसे नहीं होते पर अक्सर ऐसे ही होते हैं ये कहने में कोई हर्ज नहीं। 


आपके  भी चाय के किस्से होंगे। क्या आपके किस्से मेरे ब्लॉग से मिलते-जुलते हैं तो कॉमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

@ammazworld.blogspot.com 



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