ऑनलाइन क्लासेज बच्चों की ,आफत मम्मियों की..
कहने में तो बड़ा शानदार लगता है ,की हमारे बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे है। पर क्या हकीकत में ये क्लासेस शानदार हैं ? इस सवाल पर हर पेरेंट्स की अपनी राय है। तो चलिए छोटी सी कहानी के जरिये रूबरू होते हैं ऑनलाइन क्लासेस के नए सिस्टम और बच्चों की मानसिकता से।
ओह! शीट। ...''मम्मा आज लॉगिन में देर हो गई, और देखो ना , मेरा लॉगिन नहीं हो रहा। ''युव बेटा, देर नहीं बहुत देर हो गई है। ..11 बजे की क्लास थी। ''मम्मा में 11 .05 बजे से लॉगिन कर रहा हूँ...और अब ११.१५ बज चुके हैं। ''रुक, मैं अपना काम रोक कर देखती हूँ। ....मां को युव के डेस्कटॉप तक आते - आते 11 .20 बज गए । .....''तभी कहती हूँ, 5 मिनट पहले लॉगिन किया करो''। ...और फाइनली 11 .25 पर युव की क्लास में एंट्री हो गई। मैडम ने युव को गुडमॉर्निंग विश किया और कहा ,''नाउ किड्स प्लीज नोट डाउन दी होम टास्क। 10 मिनट् मैडम ने होमेटास्क एक्सप्लेन किया और 5 मिनट डाउट क्लियर करके, क्लास ओवर हो गयी....ये थी, युव की इंग्लिश क्लास 40 मिनट की। इसी तरह 40 -40 मिनट की क्लासेस हुई और स्कूल का एक दिन ख़तम। 3 बजे सुहानी के मोबाइल पर, मैडम ने क्लास ग्रुप में सारे सब्जेक्ट्स की अपडेट भेज दी कुल १८-१९ स्क्रीनशॉट और पिक्स थी.. उसके साथ आर्ट एंड क्राफ्ट , डांस , कराटे , योगा क्लासेज की वीडियोअलग। हालांकि युव रोज लेट नहीं होता था। पर अगर लेट नहीं होता, तो कभी नेटवर्क का इश्यू, कभी बच्चे एक - दूसरे को होल्ड या रिमूव कर देते, कभी लाइट चली जाती तो,सिस्टम स्टार्ट होने में वेस्ट होने वाला टाइम, जैसे कई इशू ऑनलाइन क्लासेस में बच्चे फेस करते ही हैं।
शाम को सुहानी अपनी बालकनी में अपने +मोबाइल को देखते हुए मधुरेश (पति ) के साथ चाय पी रही थी।
सुहानी - ''यार ये स्कूल से इतने मैसेज आ जाते है की मेरा मोबाइल आजकल हैंग होने लगा है...एक काम करती हूँ, क्लास ग्रुप में लॉक डाउन तक तुम्हारा नंबर ऐड करवा देती हूँ मधु ''। ....
मधु - ''अरे नहीं - नहीं यार, प्लीज,,, हाथ जोड़ता हूँ... मेरे मोबाइल में कई ऑफिशियल डॉक्यूमेंटस होते हैं, कहीं गलती से कुछ डिलीट हो गया तो परेशानी हो जाएगी मुझे'' ।
सुहानी - ''मेरे भी ऑफिस की कई डाक्यूमेंट्स होते हैं मोबाइल पर। ये तो कोई बात नहीं हुई मधु''।
मधु - ''यार सुहानी, मैं दो टाइम बर्तन मांज दूंगा पर युव के स्कूल के झमेले से मुझे दूर ही रखो प्लीज ''।
अगले दिन सुबह सुहानी ऑफिस के काम को छोड़कर 10 .45 बजे ही युव की ऑनलाइन क्लास में लॉगिन करने लगी, और आज हर कोई समय पर था। टीचर - 'गुड़मॉर्निग चिल्ड्रेन्स'। .....और पढ़ाई शुरू हो गई। ठीक ३ बजे उस दिन स्कूल का सारा काम सुहानी के मोबाइल पर अपलोड हो गया था। आज सुहानी ने सुबह ही, सोच लिया था, कि वो ऑनलाइन क्लास की पूरी एक्टिविटी का आज दिन भर मुआयना करेगी, सुहानी ने तुरंत सारे मैसेज चेक किए, उसे लगा युव अभी थर्ड क्लास में खुद से नहीं कर पायेगा, इसलिए वो खुद युव को आज से पढ़ाएगी। सुहानी ने युव को खाना खिलाया। उसकी अपनी खुद की ऑफिस मीटिंग 6 बजे शुरू होनी थी इसलिए सुहानी युव को लेकर 4 बजे डेस्कटॉप के सामने रिविज़न कराने बैठ गई। 5 .00 बजे तक युव ध्यान से पढ़ रहा था, पर उसके बाद वो अपनी आखों को कभी बड़ा करे... कभी छोटा करे .....कभी हाथों से मले तो कभी अपनी टेबल पर रखी बोतल की ठंडक आँखों पर लगाए। सुहानी ने पूछा, ''नींद आ रही है क्या आपको युव?''...''नहीं मम्मा, आखों में दर्द हो रहा है'', सुहानी ने तुरंत डेस्कटॉप बंद किया, और युव को दुलारते हुए सुला दिया। पर सुहानी के दिमाग में ऑनलाइन क्लास की स्क्रीनिंग टाइम खटक रही थी...उसने सोचा चलो युव की क्लासमेट की मां से बात करके देखते हैं, वे अपने बच्चों को कैसे मैनेज कर रही है?. सुहानी ने अपने जानने वाली मिताली को फ़ोन मिलाया। मिताली की बेटी मिहिका और युव अच्छे दोस्त भी हैं। सुहानी - हे हाय ....मिताली, मिहिका कैसी है? और कैसी चल रही है उसकी ऑनलाइन क्लासेस ?
मितली - पूछो मत यार सुहानी, इन क्लासेज ने तो नाक में दम कर रखा है। बहुत प्रॉब्लम होती है, एक तो बच्चे टेक्निकल चीजे नहीं जानते तो हमें इनके साथ लगना पड़ता है।
सुहानी - तो तुम होमवर्क कैसे कराती हो उसे?..आइ.. मीन तुम मिहिका को कितने समय तक ऑनस्क्रीन रखती हो ?
मिताली - बस वही ११ बजे से २ बजे तक। ...
सुहानी - फिर उसे रिविज़न कैसे कराती हो?
मिताली - तुम्हे तो पता है मेरे २ बच्चे हैं, बेटा सिक्स्थ में है, तो वो अपना मैनेज कर लेता है, पर मिहिका के साथ तो ११ बजे से में खुद बैठती हूँ बगल में। ..मैडम जो भी पढ़ाती हैं, वो मैं उसी समय अपनी भाषा में नोट कर लेती हूँ। फिर मिहिका को शाम को समझा देती हूँ। ऐसे में अगर मैं उसे ऑनस्क्रीन ही रिविज़न करवाऊं तो वो नन्ही सी जान दिन पर ऑनस्क्रीन ही बैठी रह जाएगी। तबियत और आखों पर भी तो बुरा असर होगा।
सुहानी - हां, बात तो सही है... पर युव की क्लासेस के समय पर मेरा ऑफिस होता है, ऐसे मे मैं कैसे कर पाऊंगी ?
मिताली - तुम इतनी टेंशन मत लो। कुछ दिनों की बात है फिर सब नार्मल हो जाएगा। कोई बात नहीं अगर एक सेमिस्टर नंबर अच्छे नहीं आए तो। हमारे बच्चों की सेहत से बढ़कर तो कुछ भी नहीं। ...मैं तुम्हे यही सलाह दूंगी, जो मोबाइल पर क्लास वर्क होता है, वो तुम जब समय मिले युव को समझा दिया करो। और उसकी आखों का ख्याल रखो।
सुहानी को अपने कई सवालों के जवाब मिल चुके थे, और ये समझ आ गया था, कि घर के काम के साथ-साथ माँए कितनी मेहनत कर रही हैं इस ऑनलाइन क्लासेस की आफत से बचने के लिए।
बात तो सही है , हालात हमेशा तो ऐसे नहीं रहेंगे। क्या हुआ जो नंबर कम आए ?यकीन मानिये इन हालात में ऑनलाइन क्लासेस के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसे में पेरेंट्स को अपनी दिनचर्या के हिसाब से खुद तय करना होगा की वो इस आफत से कैसे निपटे। (अपने अगले आर्टिकल में इसी मुद्दे से जुड़े मैं बताऊंगी कुछ टिप्स और ट्रिक्स। ....फॉलो करिएगा।)
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